फर्जी शस्त्र लाइसेंस का भंडाफोड़, एसटीएफ जांच में बड़ा खुलासा

फर्जी शस्त्र लाइसेंस का भंडाफोड़, एसटीएफ जांच में बड़ा खुलासा

देहरादून। उत्तराखण्ड में अवैध शस्त्र और फर्जी लाइसेंस के जरिए आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की कार्रवाई में बड़ा खुलासा हुआ है। गोपनीय शिकायत के आधार पर की गई जांच में बाहरी राज्यों से फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस बनवाकर उत्तराखण्ड में पंजीकृत कराने का मामला सामने आया है।

एसटीएफ द्वारा की गई जांच में पता चला कि कई लोगों ने फर्जी एनओसी के आधार पर बाहरी राज्यों के शस्त्र लाइसेंस उत्तराखण्ड में दर्ज कराकर उनका इस्तेमाल किया। इसी क्रम में अमित यादव पुत्र डालचन्द, निवासी हनुमंत रेजिडेंसी, शिमला बाईपास, थाना पटेलनगर देहरादून का नाम सामने आया।

जांच के दौरान वह अपने पते पर नहीं मिला और मोबाइल नंबरों पर भी संपर्क नहीं हो सका। जिलाधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार अमित यादव के नाम शस्त्र लाइसेंस संख्या 1499 थाना क्लेमेंटाउन देहरादून में दर्ज पाया गया, जिसे वर्ष 2013 में अमृतसर (पंजाब) से जारी और वर्ष 2017 में देहरादून में स्थानांतरित दिखाया गया था।

हालांकि एसटीएफ द्वारा अमृतसर के जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से की गई पुष्टि में खुलासा हुआ कि उक्त लाइसेंस अमित यादव के नाम से कभी जारी ही नहीं हुआ। जांच में यह लाइसेंस किसी अन्य व्यक्ति दर्शन सिंह के नाम से जारी पाया गया। इससे स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर और अधिकारियों को गुमराह कर लाइसेंस दर्ज कराया।

एसटीएफ के अनुसार यह कृत्य धोखाधड़ी और जालसाजी की श्रेणी में आता है। मामले में आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की गम्भीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किए जाने की संस्तुति की गई है। एसटीएफ का कहना है कि इस तरह के मामलों में आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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