- उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार किए गए हैं कोर्सः मजूमदार
- तीन एमबीए और चार यूजी प्रोग्राम हुए शुरू
- को-डिज़ाइन, को-क्रिएट व को-डिलीवर मॉडल पर आधारित नई पहल
देहरादून। उच्च शिक्षा को उद्योग से सीधे जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए यूपीईएस स्कूल ऑफ बिजनेस और ईवाई इंडिया ने सात नए शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। इन कार्यक्रमों को दोनों संस्थानों ने मिलकर को-डिज़ाइन, को-क्रिएट और को-डिलीवर मॉडल के तहत तैयार किया है।
नए कार्यक्रमों में तीन एमबीए और चार अंडरग्रेजुएट कोर्स शामिल हैं। एमबीए में एआइ फॉर बिजनेस, फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग एंड कैपिटल मार्केट्स शामिल हैं। वहीं यूजी स्तर पर बीबीए डेटा साइंस एंड एआई, बीकॉम अकाउंटिंग एंड फाइनेंस, बैंकिंग एंड इंश्योरेंस और इंटरनेशनल फाइनेंस जैसे कोर्स शुरू किए गए हैं।
इस पहल के साथ दोनों संस्थानों की संयुक्त पेशकशें बढ़कर आठ हो गई हैं। इनमें चार एमबीए और चार यूजी प्रोग्राम शामिल हैं, जो उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार किए गए हैं। कार्यक्रमों की खासियत यह है कि इनमें छात्रों को सीधे उद्योग से जुड़ा अनुभव मिलेगा। एमबीए में 600 घंटे से अधिक और यूजी कोर्स में 270 घंटे से अधिक की पढ़ाई ईवाई के विशेषज्ञों द्वारा कराई जाएगी। इससे छात्रों को वास्तविक बिजनेस माहौल, कार्यप्रणाली और प्रोफेशनल स्किल्स की समझ विकसित होगी।
यह साझेदारी छात्रों को उद्योग से जोड़ने का मौका देगीः वारसी
इन कोर्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल फाइनेंस, डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया और बदलते वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। उद्देश्य ऐसे प्रोफेशनल तैयार करना है जो जटिल समस्याओं का समाधान कर सकें और तेजी से बदलती दुनिया में खुद को ढाल सकें।
वाई इंडिया के पार्टनर मोहम्मद फुरकान वारसी ने कहा कि यह साझेदारी छात्रों को शुरुआत से ही उद्योग से जोड़ने का मौका देती है, जिससे उनमें निर्णय क्षमता और आत्मविश्वास विकसित होता है। वहीं यूपीईएस स्कूल ऑफ बिजनेस के एसोसिएट डीन अरूप मजूमदार ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में उच्च शिक्षा को भी उसी गति से बदलना जरूरी है और ये कार्यक्रम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
इस साझेदारी का उद्देश्य छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाना और उन्हें भविष्य के अवसरों के लिए तैयार करना है। नई पहल के साथ यूपीईएस ने उद्योग, अकादमिक सहयोग के क्षेत्र में एक नया मानदंड स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।



