- जमीनों की बंदरबांट की शिकायत लेकर लोकभवन पहुंची कांग्रेस
- सरकार ने 40 सरकारी संपत्तियाँ निजी हाथों में सौंपीः गोदियाल
- जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की लीज निरस्त करने और यूआईआईडीबी के टेंडर रद्द करने की मांग
- गणेश जोशी, सहकारिता भर्ती और एमबीबीएस दाखिलों की जांच का मुद्दा भी उठाया
देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी जमीनों और बेशकीमती संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने के मुद्दे पर कांग्रेस ने धामी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को राज्यपाल से मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार सरकारी जमीनों और ऐतिहासिक महत्व की संपत्तियों को कथित तौर पर औने-पौने दामों पर निजी कंपनियों को सौंप रही है। पार्टी ने ऐसे सभी फैसलों को निरस्त कर संपत्तियां उनके मूल विभागों को वापस लौटाने की मांग की है।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के समक्ष जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट मसूरी की लीज, यूआईआईडीबी के माध्यम से सरकारी संपत्तियों के हस्तांतरण और भूमि आवंटन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। पार्टी ने दावा किया कि प्रदेश के 13 में से 12 जिलों में स्थित करीब 40 सरकारी संपत्तियों का बाजार मूल्य एक लाख करोड़ रुपये तक हो सकता है। कांग्रेस ने इन संपत्तियों को लेकर अपनाई गई प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
राज्यपाल से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत, विधायक मदन बिष्ट, फुरकान अहमद, पूर्व विधायक मनोज रावत, प्रदेश उपाध्यक्ष सीपी सिंह, राजीव महर्षि, प्रदेश महामंत्री राजेंद्र शाह, महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला, सुरेंद्र सिंह रांगड़ व राजेश चमोली आदि शामिल रहे।
मुख्यमंत्री के हाथों में केंद्रित किए गए अधिकार: कांग्रेस
ज्ञापन में कांग्रेस ने 20 दिसंबर 2022 के कैबिनेट निर्णय का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सभी विभागों की सरकारी भूमि के संबंध में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मुख्यमंत्री के स्तर पर केंद्रित कर दिया गया। पार्टी का कहना है कि यह निर्णय मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व और सरकार की कार्य नियमावली की भावना के विपरीत है।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि विभागों की जमीन और संपत्तियों को हस्तांतरित करने जैसे महत्वपूर्ण फैसलों में संबंधित विभागीय मंत्रियों की सहमति क्यों नहीं ली गई।
जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की लीज पर उठाए सवाल
कांग्रेस ने मसूरी स्थित ऐतिहासिक जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट का मामला प्रमुखता से उठाया। प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि बाजार मूल्य हजारों करोड़ रुपये होने के बावजूद करीब 142 एकड़ भूमि और राष्ट्रीय धरोहर को 15 साल के लिए लगभग एक करोड़ रुपये सालाना किराये पर निजी कंपनी को सौंप दिया गया। ज्ञापन में पटवाडांगर और डाकपत्थर की जमीनों के हस्तांतरण को लेकर भी सवाल उठाए गए। इसी तरह डाकपत्थर की जमीन को भी बंदोबस्त पूरा हुए बिना और खसरा संख्या के अभाव में हस्तांतरित किए जाने का आरोप लगाया गया है।
ऐतिहासिक भवनों और वन भूमि पर भी जताई चिंता
हरिद्वार के अलकनंदा होटल, ऋषिकेश समेत 25 निरीक्षण भवनों और रामगढ़ स्थित राजकीय उद्यान की जमीन का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें ऐतिहासिक महत्व की इमारतें और वन क्षेत्र भी शामिल हैं।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने यूआईआईडीबी के तीन टेंडर तत्काल निरस्त करने की मांग की। इनमें पटवाडांगर, हरिद्वार का अलकनंदा होटल और ऋषिकेश निरीक्षण भवन से संबंधित टेंडर शामिल हैं। पार्टी ने लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवनों को पीपीपी मोड में देने की प्रक्रिया पर भी रोक लगाने की मांग की।
गणेश जोशी के मामले में न्यायालय के निर्देशों के पालन की मांग
सरकारी जमीनों के मुद्दे के अलावा कांग्रेस ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले को भी राज्यपाल के सामने उठाया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इस मामले में न्यायालय की ओर से मुकदमा दर्ज करने की अनुमति से संबंधित निर्देश दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने अब तक आवश्यक कार्रवाई नहीं की है।
वही, कांग्रेस ने सहकारिता विभाग में कोरोना काल के दौरान हुई भर्तियों में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इसके अलावा प्रदेश में एमबीबीएस की सीटों पर कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिले किए जाने का मामला भी उठाया गया।
रेखा आर्य प्रकरण में सीबीआई और ईडी जांच की मांग
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्यपाल के संज्ञान में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य से जुड़े एक अन्य मामले को भी उठाया। उन्होंने कहा कि मंत्री के पति की ओर से उन पर 210 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगाए गए हैं।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मांग की कि ज्ञापन प्राप्त होने के 10 दिनों के भीतर विवादित निर्णयों को निरस्त करने और सरकारी संपत्तियों को उनके मूल विभागों को वापस लौटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने निर्धारित अवधि में फैसले वापस नहीं लिए तो उत्तराखंड की जनता की संपत्ति की रक्षा के लिए कांग्रेस उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी।




